सुकून भरे जीवन की तलाश

गुड़गांव, दिल्ली और मुंबई के बड़े बड़े अपार्टमेंट में रहने वाले जो म्युचुअल फंड, ये फंड और वो फंड के पैसे जोड़ जोड़ के एक सुकून भरे जीवन की तलाश में सारी उम्र लगे रहते हैं, अब उन्हें ये बात अच्छी तरह समझ लेनी चाहिए कि उनकी स्कूली शिक्षा और बड़ी नौकरी मात्र एक भ्रम के सिवा कुछ नहीं है

जिसे इस दौर में भी ये समझ न आए तो क्या कहा जाय......
अगर आप अभी भी दिन रात इसी में अपना जीवन काला कर रहे हैं कि अपने बच्चे को महंगे से महंगे स्कूल में पढ़ाना है और फिर JEE से लेकर जाने कितने कंपटीशन की तैयारी करवा के इंजीनियर बनाना है वो आपको क्या कहा जाए..... B.Tech वगैरह अगर इस दौर में भी आपके लिए एक मात्र लक्ष्य है तो फिर भगवान ही आपका और आपके बच्चों का भला करे.....
यहां, जिस गांव के पास मैं रहता हूं, वहां एक लड़का जो मेरे यहां दूध देने आता है, उसके पिता के पास पचास बीघे से अधिक ज़मीन है........पचास बीघा, शायद इसकी आप कल्पना भी नहीं कर सकते हैं.. और वो, इतनी ज़मीनों का मालिक, घर में चालीस पचास भैंस पाले हैं,
वो लड़का दूध लेकर आता है और उसके पिता ने एक बाइक तक उसे नहीं दिलवाई.. अभी पिछले महीने उसने मुझ से और एक दो लोगों से दूध के दो चार महीने के पैसे एडवांस लेकर बाइक खरीदी है....
उसका पिता जो मालिक है इतनी ज़मीनों का, उसे आप दिन भर खेत में ही पाएंगे.. एक धोती और सिर पे पगड़ी लपेटे.. और मेरे सामने ऐसा हाथ जोड़कर खड़े होते हैं जैसे मैं कोई उनका मालिक हूं जबकि वो मेरे जैसों को चुटकी में खरीद लें..... उनको ज़मीन खरीदनी होती है तो रुपए तो ऐसा बैंक से ट्रांसफर करते हैं जैसे बीस हज़ार रुपए कर रहे हों
आपको क्या लगता है, अगर ये व्यक्ति B.Tech करके शहर चला गया होता तो इसने म्यूचुअल फंड में अपनी सैलरी से हर महीने पांच हज़ार रुपए लगा कर कितनी ज़मीन खरीदी होती? आपको ज्ञात हो कि ये उसकी पुश्तैनी ज़मीन नहीं है, सब उसने अपने जीवन में वहीं गांव में रहकर खरीदी है.. आप गूगल से लेकर कहीं भी नौकरी कर लें, अपने जीवन में डेढ़ बीघा ज़मीन खरीद के दिखा दें
20 साल पहले मै जब गुड़गांव में अपने एक मित्र के पास था, तो गाड़ी में घूमते घूमते मेरा मित्र मुझे अपने 5 साल के बेटे के स्कूल ले गया.. बहुत बड़ा आलीशान स्कूल.. बड़ा सा मैदान.. बहुत अच्छा लैंडस्केप.. मेरे मित्र ने गर्व से शेखी बघारते हुवे मुझ से कहा कि "देख, मेरे बेटे के स्कूल का ग्राउंड ही सिर्फ़ 3 एकड़ का है".. तो मैने उस से कहा "उसे यहां पढ़ने भेजते हो या चरने?".. जिस पर मेरा मित्र नाराज़ हो गया.. और आज.. उसका बेटा एक कंपनी से दूसरी कंपनी में नौकरी बदलता घूम रहा है.. और जितना पैसा उसके बाप ने उसे पढ़ाने में ही खर्च कर दिया, उसका 2 प्रतिशत भी अभी तक नहीं कमा पाया है
ये ऊंचे ऊंचे फ्लैट में रहने वालों की शिक्षा और संपन्नता के नाम पर ऐसी बुद्धि भ्रष्ट हो जाती है कि वो EMI, म्युचुअल फंड, लाइफ इंश्योरेंस, ये इंश्योरेंस, वो इंश्योरेंस में ही सारी उम्र स्वयं का जीवन सुरक्षित करते करते मर जाते हैं और जितना ये सच में सारी उम्र सेविंग के नाम पर बचाते हैं, उतनी क़ीमत गांव के एक किसान की दो बीघा ज़मीन की होती है.. ऐसी खोखली लाइफ इनकी होती है कि ये बड़े होटल, रिजॉर्ट, बड़े स्कूल में जा कर वहां कुछ दिन ठहर कर उसे अपना समझने लगते हैं.. वहां की फ़ोटो डाल के अपना बड़प्पन दिखाएंगे और लुंगी पहने खेत में खड़े किसी आदमी को बड़ा कमतर समझेंगे जबकि उसका एक बीघा खेत इनके सारे जीवन की कमाई होता है
ये तुम्हारे फ्लैट, वो चाहे जितनी ऊंची और जितनी बड़ी सोसाइटी में हों किसी काम के नहीं होते हैं.. उनकी हाई फाई कीमत महज एक बुलबुला है.. तुम्हारे बच्चे जो EMI पर उठाई गई महंगी कार में घूम रहे हैं, वो मेरे यहां दूध लेकर आने वाले उस लड़के से कहीं ज्यादा गरीबी और खोखली ज़िंदगी जी रहे हैं.. सालों तक तुम्हारे बच्चे बड़े और महंगे स्कूल और उसके बाद एलन और आकाश इंस्टीट्यूट जैसे फ्रॉड कोचिंग में अपना कीमती जीवन बर्बाद करके इंजीनियर बन जाते हैं और उसके बाद वो कितनी भी ऊंची पोस्ट पर पहुंच जाएं, रोड किनारे किसी शहर में पानी पूरी का ठेला लगाए इंसान से कम ही कमाएंगे
मेरे यहां जो लड़का मेरी प्रॉपर्टी की देखभाल करता है, उसके कस्बे में उसका छोटा सा ढाबा टाइप है उसके पिता का और रोज़ के वो 500 टिक्की और 500 समोसे बेचते हैं.. 10 रुपए की एक टिक्की भी मान लो और 5 रुपए का एक समोसा तो रोज़ के 7500 रुपए हुवे जो कि महीने के 2 लाख पच्चीस हज़ार हुवे.. इतना तुम शहर में कमाते हो तो छुट्टी मनाने अंडमान भाग जाते हो और खुद को बड़ा आदमी समझते हो और गर्व करते हो कि अगर तुमने B.Tech न किया होता तो तुम्हारा क्या होता.. जबकि इंस्टाग्राम पर कमर मटका कर भी लोग तुमसे कहीं ज़्यादा कमा रहे हैं.....
ये दौर आंख खोलने वाला दौर है.. इस दौर में भी आप "रैट रेस" नहीं छोड़ेंगे तो अब शायद ही कोई ऐसा दौर आए जहां आपकी आंख खुले

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